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जर्जर हो रहे हैं विद्यालय, छात्रों की सुरक्षा के सवाल पर कब जागेगा पंचकूला प्रशासन_我的网站

禁闭岛

一 |     संवाद सहयोगी, मोरनी। मोरनी क्षेत्र के विद्यालय वर्षों से मरम्मत के अभाव में बदहाली झेल रहे हैं। देखभाल के अभाव में इन भवनों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। दीवारों का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है और जगह-जगह लेंटर से सरिया निकलकर बाहर आ गया है, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है।,विभाग की ओर से भवन की वास्तविक मरम्मत करवाने के बजाय केवल रंग–रोगन करके इन्हें चमकाने का प्रयास किया जाता है, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। मोरनी खंड के अनेक स्कूलों में न तो भवनों की दशा सुधरी है और न ही फर्नीचर की स्थिति बेहतर है। कमरों की छतों से सीमेंट व प्लास्टर के टुकड़े गिर रहे हैं। कई स्कूलों के शौचालय क्षतिग्रस्त हैं जिनकी तत्काल रिपेयर की आवश्यकता हैं।,ठंडोग पंचायत के प्राथमिक विद्यालय थाना–बडयाल स्कूल इन स्कूलों में से एक है। यहां का भवन बेहद पुराना है और इसका प्लास्टर आज तक ठीक नहीं किया गए। एक शौचालय डैमेज किया हुआ है उसकी हालत इस कदर खराब है कि इसकी छत से प्लास्टर के टुकड़े गिरते रहते है। कमरों के ऊपर सुरक्षा के लिए डाले गए बीम का सरिया निकल चुका है जिसे पेंट से छुपाया जाता है।,विद्यालय का आंगन अभी तक पक्का नहीं बन पाया है, जिससे बच्चों को बारिश के मौसम में कीचड़ और कंकड़ पत्थरों से परेशानी झेलनी पड़ती है। स्कूल के नीचे सड़क की तरफ से बारिश की बाद पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा भूस्खलन के कारण गिर गया है जिससे स्कूल को भी खतरा पैदा हो गया है। लोक निर्माण विभाग को विद्यालय ने अवगत करवाया लेकिन अभी तक इस खतरे के प्रति कोई सचेत नहीं हुआ।,थाना–बडयाल के इस स्कूल में कक्षाओं की छतों में सीलन के कारण लगातार सीमेंट झड़ रहा है, जिससे छात्रों को चोट लगने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि दीवारों पर काई जमी हुई है और प्रशासन की लापरवाही के कारण भवन की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है।,इसी स्कूल के साथ लगते एक अन्य प्राथमिक स्कूल मोडी– कडेरन में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है जहां भवन की दीवारों में बड़े बड़े क्रैक और दरारें इसके ढहने की ओर संकेत कर रही हैं। स्कूल की दीवारों पर काई जमी हुई है और इनकी मरम्मत की अभिभावक अनेकों बार मांग कर चुके हैं,ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि ऐसे माहौल में आखिर वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने का साहस कैसे करें। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभाग जल्द स्कूलों की मरम्मत कराए और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाए, ताकि संभावित खतरे से उनका बचाव हो सके।。    

澎湃新闻主笔 沈彬连日来,伴随着更多事实的披露,“两人三座”一事的讨论已远远超出个案范畴,更多具有重思规则的意义。随着当事人母亲接受采访介绍了更多内情,舆论讨论也从“花钱能不能多占座”转向另一个议题:当家长无力贴身护送,铁路该如何保障未成年人的单独出行?据当事人的澄清,两个未成年女孩趁着暑假来到上海和父母团聚,返乡时,因为母亲实在请不出假,无法陪着坐27个小时的火车返乡;而按照铁路购票规则,儿童票不能独立下单,必须绑定成人票购买;如果先一起买,再退掉成人票,仅保留儿童票,铁路方面却提示,此时列车员有权要求孩子下车——此路不通。

二 | 同时,考虑两个未成年女孩独自乘车的安全因素,避免她俩身旁坐了陌生男性,妈妈最终选择买下第三张成人席位,“浪费”一张车票,同时也保证两个孩子有宽裕的空间。

三 | 回头看,两个女孩占三个座位并不完全是放零食,而是妈妈的一片苦心:自己请不出假陪护,孩子要返乡开学;单独买儿童票,铁路规则又不允许;索性多买了一张票。对这个新闻,公众的关注点也从所谓“金钱和效率”之争,转向了更加贴地气的未成年人出行的民生痛点。被浪费的236元的成人票,并不是臆想中的“有钱就任性”,而是妈妈在既有规则之下的无奈之举。相较于铁路部门回应中“席位使用权”“合同相对性”等法言法语的专业阐释,“候鸟孩子”返乡途中陪护缺位的现实困境,才是更值得直视的民生痛点。“两人占三座”不是多花钱享受舒适和特权,而是普通打工人面对制度缝隙时的无奈变通。14岁以下未成年人无法单独购买火车票,可并非所有家长都有条件陪同孩子踏上旅程。

四 | 尤其对于亲子分居两地、仅靠寒暑假短暂团聚的“候鸟儿童”,独自乘火车往返几乎是许多家庭的常态。

五 | 航空领域早已建立成熟的无成人陪伴儿童服务体系,家长无法随行时,可以提前申请托管,实现从送机、机中照料到到站核验接领人的全流程闭环管理。

六 | 铁路系统能否参照这套成熟思路,推出相适配的未成年人陪伴托管服务?当然,普速列车站点多、人员流动性大,乘务员配置有限,很难直接照搬航空一对一托管的模式,但不妨借鉴其制度内核,探索属于铁路版的“小候鸟”陪伴机制。

七 | 发现问题、讨论问题是解决问题的第一步和第二步,办法总比困难多。可以考虑设立可预约的未成年人重点关照通道,完善独自乘车未成年人登记制度,明确送站、在途关照、到站交接的流程,设置合理的服务机制甚至适度收费的专项陪护选项,厘清权责边界,把散落在民间的“土办法”纳入规范化的制度框架之内,补上未成年人独自长途出行的民生短板。

八 | 公共交通的公平,不只有防止“花钱就能多占资源”,也包含对特殊处境群体的制度关照。三张火车票的背后,是千万个务工家庭的现实困境、“候鸟家庭”的不得已。制度理应补上缺口,让孩子漫长的返乡旅途,不必靠家长花钱买一张空座位来换取安全感。这起事件也提醒我们:公共讨论与其执着于“公平正义”的抽象演绎和交锋,不如回归事实、倾听当事人的真实诉求。“两人三座”不是金钱与公平之争,而是铁路出行民生痛点的具象化。

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Published on:05:51:19


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